गंगुबाई- चुप हो गयी कोयलिया....

GORAKHH पिछले दो वर्षों से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रति मेरी रूचि का बढ़ना मेरे लिए बहुत आश्चर्यजनक घटना है। आश्चर्यइ इस दुःख के साथ है क्योंकि मेरी पीढ़ी के पास शास्त्रीय संगीत को सुनने और उसे छू पाने के अवसर अब ना के बराबर है। संगीत के सारे माध्यमों... [पूरी पोस्ट]
writer Gopal Singh

gangubai

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[29 Jul 2009 04:31 AM]

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