कुलधरा
उजड़े पातालों की कोखबिसरा है नादसद् सद् आरूढ़खण्डहरों की देवीतुम हो आंलिगतश्रापित देह विभूति बनपत्थरों का अरण्यपाया है तुमनेनींद से टूटे जगराते इसी धरा पर बचे होंगेछत गिरे घौंसलों मेंरति का संतापअनावृत खण्डहर काआबद्ध मौनकुलधराइन्हीं पराजयों का जन्म काल...
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Gopal Singh
कुछ शब्द जैसे मैं......
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[02 Sep 2009 06:24 AM]



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