नि:शब्द

GORAKHH पहाड़ों में नहीं रहता जंगल या कोई नदी। घुप्प अंधेरे में बसता है यहां मॊन, नि:शब्द। तुम जिसे सुनते हो स्पर्श, हवा और हवा के बीच। तुम जिसे देखते हो सॊंदर्य, दृश्य और दृश्य के बीच। वह कहीं गहरा है अपने मन सा. अपनी ही खोज में किसी और पहाड़ पर।... [पूरी पोस्ट]
writer Gopal Singh

कुछ शब्द जैसे मैं......

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[25 Sep 2009 02:17 AM]

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