मयखाने की दास्तां......................
मयखानों में पीने वाले भी क्या पीते हैंचन्द पलों के नशे के बाद फिर दुनिया में जीते हैं मदहोश तो वो होते हैं 'जालिम' जो सदा नशे में रहते हैं जाम नहीं छलकाते वो महबूबा की आखों से जो पीते हैं मयखानों में जाने वाले पैमानों को आजमाने वालेजाम खत्म हो जाने...
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SUNIL DOGRA जालिम
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[21 Apr 2007 13:00 PM]



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