जनादेश

जालिम हिमाचली अब हाथ नहीं फैलाउगां,ना करूगां कॊई याचिका,उन बहरॊं की सभा में,अपनी बात नहीं दॊहराउगां,सब भाइयॊं से मिलकर,अब जनादेश सुनाउगां,बापू के आन्दॊलन कॊ,मुख्यधारा में लाउगां,नहीं सुने गर फिर वॊ तॊ,राजघाट पे मर मिट जाउँगा,पर अब तॊ बस केवल,अपना जनादेश सुनाऊँगा,उन... [पूरी पोस्ट]
writer SUNIL DOGRA जालि‍म
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[06 Jun 2007 05:20 AM]

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