किलर

कहानी ट्रेन धीरे धीरे रफ्तार पकड़ने लगी. प्लेटफार्म पीछे छूटने लगा. मैं जो अब तक अपनी सीट पर मुड़ी हुई खिड़की से बाहर झांक रही थी तो घूमकर सीधी हुई. जैसे ही मैं सीधी हुई तो मेरी नजरे सामने बैठे व्यक्ति पर गिरी और मेरी उपर की सांस उपर और नीचे की सांस नीचे रह गई.... [पूरी पोस्ट]
writer Vimla Bhandari
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[07 Sep 2009 12:55 PM]

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