बच्चे और हम

दरअसल… बच्चों को भागीदार मानने की बजाए जैसे ही सिर्फ आश्रित की श्रेणी में रख दिया जाता है वैसे ही बच्चा समान दर्जा पाने की बजाए अपने बड़ों के पूर्वाग्रहों और अपूर्ण आकांक्षाओं की पूर्ति का साधन बन जाता है। हमें देखना होगा कि बच्चे खिलौनों से ले कर शिक्षार्थ चुने... [पूरी पोस्ट]
writer Pawan Meraj

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[17 Sep 2009 13:46 PM]

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