पत्रकार या जासूस...
क्राइम की घटनाओं को कवर करने वाले पत्रकार को कई बार किसी जासूस की तरह भी काम करना पडता है। मेरठ की ये घटना इसी की मिसाल है। दिमाग हर वक्त चौकन्ना रहे और हर संभावना को सावधानी से टटोला जाए. तो सच तक पहुंचना जरा भी मुश्किल नहीं होता। भले ही सच को सात तालों...
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SUBHASH GUPTA
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[04 Sep 2009 08:24 AM]



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