आधी रात हो चली है.

प्रखर दैनन्दिनी आधी रात हो चली है. दिल्ली में झमा-झम बारिश हो रही है. काश के ये बारीश जुलाई-अगस्त में हुई होती तो मेरे पापाजी को कड़ी धूप में खेतों में पानी ना चलवाना पड़ा होता.उनकी तबियत ख़राब हुई सो अलग.JNU के इस ब्रह्मपुत्र हॉस्टल में बैठा-बैठा मै कई बार ये सोच रहा... [पूरी पोस्ट]
writer श्रीश पाठक 'प्रखर'

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[10 Sep 2009 14:55 PM]

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