अपना अपना समयाकाश
अक्सर ज्योतिष को विज्ञानं मानने और न मानने पर जब तर्क दिए जाते है तो दोनों पक्ष पूर्वाग्रहों से ग्रसित हो कर अपनी स्थापित धारणाओं के परे कुछ भी सुनना पसंद नहीं करते है.और विज्ञान के मूल अर्थ से परे रहकर वैज्ञानिकता पर चर्चा करने लगते है.एक पक्ष ज्योतिष...
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प्रकाश पाखी
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[18 Sep 2009 15:33 PM]



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