तुम....?

Shreesh UVACH मै बुलाता हूँ तुम्हे, हहाकर मिलता हूँ, भर लेता हूँ, तुम्हे बाँहों में. तुम अपनी एक फीकी हंसी में रंग भरने का प्रयास करते हो. जूझती जिंदगी में अचानक मिली , तुम्हारी जीत पर नाचता हूँ, और करता हूँ, तुम्हारी ताली की प्रतीक्षा. मुझे खुश-मिजाज कहते हैं, लोग... [पूरी पोस्ट]
writer श्रीश पाठक 'प्रखर'

तुम....?मै

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[09 Sep 2009 09:22 AM]

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