"तुम मुस्कुरा रही हो, गंभीर.."

Shreesh UVACH       विस्तृत प्रांगण तिरछी लम्बी पगडंडी अभी बस हलकी चहल-पहल , विश्वविद्यालय में, दूर; उस सिरे से आती तुम गंभीर, किन्तु सौम्य, मद्धिम-मद्धिम तुम में एक मीठा तनाव है, शायद, हर एक-एक कदम पर जैसे सुलझा रही हो, एक-एक प्रश्न. तुम मुस्कुरा... [पूरी पोस्ट]
writer श्रीश पाठक 'प्रखर'

तिरछी लम्बी पगडंडी

views
6
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[10 Sep 2009 13:54 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix