अशोक वाजपेयी का कविता संसार
आसमान पर बादल छाए थे, दिल्ली भी उमस के कारण कोलकाता हुए जा रही थी। अशोक वाजपेयी जी के घर मुझे दस बजे पहुँचना था। समय को लेकर आदतन सजग हूँ इसलिए 9.30 बजे ही सोसाइटी के आसपास पहुँच गया। पूरे क्षेत्र की परिक्रमा करना अच्छा लगा। यह हरा भरा आवासीय इलाक़ा...
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RAJESHWAR VASHISTHA
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[25 Aug 2009 11:42 AM]



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