तकदीर का मातम

THOUGHT हर् घड़ी तेरी याद आती है ,सुबह भी बन के शाम आती है ।मौत देती है आदमी को पनाह ,जिंदगी किसके काम आती है।बेदिली गम असर न हो जाए ,इश्क की परदा दर न हो जाए ।मौत की आरजू से डरती हू,जिंदगी को ख़बर न हो जाए ।कैफ -ओ -मस्ती से खेलती हू मै,अपनी हस्ती से खेलती हू मै... [पूरी पोस्ट]
writer radhasaxena
views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[08 Sep 2009 19:49 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix