बचपन
बचपन के दुख भी कितने अच्छे थे,तब तो सिर्फ़ खिलोने टूटा करते थे,वो खुशियाँ भी ना जाने केसी खुशियाँ थी,तितली को पकड़ कर उछला करते थे,पाँव मार के खुद बारिश के पानी में,अपने आप को भिगोया करते थे,अब तो एक आँसू भी रुसवा कर जाता है,बचपन में तो दिल खोल के रोया...
[पूरी पोस्ट]
Ishwar
meri pasand
9
0
0
0
0
[19 Aug 2009 06:39 AM]



Shuffle








