बैचेनी

Ishwar संवेदना की स्याही से आँखो के कागज पर लिखे हुए,भीने से आँसू जैसे थोड़े से गीले शब्द चमक रहे है,होंठो की हद तोड़ कर आवाज़ का पानी तो बह गया सारा,अब तो ये हर्दय का सरोवर पीड़ा से छलकता है,जानता हूँ की तुमको नही आता इन चमकते शब्दो को पढ़ना,ओर ये दुर्भाग्य है... [पूरी पोस्ट]
writer Ishwar

meri pasand

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[19 Aug 2009 06:39 AM]

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