खामोशी
सूरज कि धुप कुछ कुछ मलिन सी लगती हैं,मिट्टी से आती खुश्बू भी कुछ ग़मगिन सी लगती हैं,हर ओर पसरा हे सन्नाटा-छाई हे खामोशी,आज फिर मन पर छाई हे गहरी उदासी...
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Ishwar
mere khyaal
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[19 Aug 2009 06:39 AM]



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