दुविधा
हर सुबह तो ऐसी नही होतीहर शाम तो ऐसे नही ढलतीकभी कभी जिंदगीउस मुकाम पर ले आती हेंकोई शब गुज़ारे नही गुज़रतीलम्हे हज़ार आते हेंदौरा-ए-उम्र के दरम्यानहर लम्हे पर तो येआँख भी नही भरती....
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Ishwar
mere khyaal
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[16 Sep 2009 06:05 AM]



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