श्री दुर्गा चालीसा

धनात्मक चिन्तन नमो नमो दुर्गे सुख करनी । नमो नमो अम्बे दुःख हरनी ।।निराकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूं लोक फैली उजियारी ।।शशि ललाट मुख महा विशाला । नेत्र लाल भृकुटी विकराला ।।रुप मातु को अधिक सुहावे । दरश करत जन अति सुख पावे ।।तुम संसार शक्ति लय कीना । पालन हेतु अन्न धन... [पूरी पोस्ट]
writer उम्दा सोच
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[26 Sep 2009 03:40 AM]

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