हमारी दुनिया बहुत भिन्न है
सृजन का सौंदर्य होया धर्म की पराकाष्ठा न्याय,संस्कृति,साधन बल,बुद्धि और धन साथ में भक्ति,ढोंग,पाखण्ड क्रोध,शोक,रोग वासना और निर्लज्जता सब कुछ तुम्हारे साए में रहते हैं हमारे पास है केवल पसीने और कीचड़ की दुर्गन्ध हमारे शब्द सीमित हैं और शब्दों के मायने...
[पूरी पोस्ट]
धीर.
8
0
0
0
0
[10 Sep 2009 07:05 AM]



Shuffle








