रात्रि बेला की ख्वाहिशें
गली-गली बने शिवालयों मेंनीरव खामोशीघुप्प अंधकारऔर धुंधले चित्रों की क्रमहीन श्रंखलामेरे प्यारे बनारस की धरती परमैं भरा हूँतुम्हारी दुनिया मेंतुम्हारे आभामंडल की दुनियाअंतहीन जैसे समयचमकीली जैसे तारेतुम्हारे बारे में सोचनाजैसे निहारनादुग्ध-धवल झीनी चादर...
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धीर.
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[10 Sep 2009 06:55 AM]



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