अभिलाषा

फ़लसफा : ज़िंदगी का वे भुलाती हुईहमारी सारी वेदनाएँ और सुखसमय और उम्रजन्म ले लेती हैंजटिल से जटिल परिस्थितियों मेंउनके आश्रय में हमलहरों की अंगडाई सुला देते हैंआकाश की ऊँचाई मिटा देते हैंआँधियों में दीप जलाने लगते हैंपत्थर की छाती पर नव-अंकुर उगाने लगते हैंवे उडाकर हमारी... [पूरी पोस्ट]
writer धीर.
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[08 Oct 2009 00:31 AM]

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