प्यार और लड़कियाँ
वे हाथ में हाथ डालकर घूमा करती हैं सिनेमा और पार्क मानो मिल रहे हों चुम्बकों के दो विपरीत ध्रुव मिलते ही एकांत घंटों बतियाती हैं मोबाइल पर गज़लें,गुलाब कॉलेज,किताब मौसम,हवा बादल,घटावफाई,बेवफाई और गढे मुर्दों की खुदाई उन्हें आती हैं सैकडों दलीलें शैम्पू...
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धीर.
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[18 Sep 2009 15:37 PM]



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