जीवन जीना है तो शराब-ऐ-हँसी पीना है

प्रेम धुन आज जब हम बहुत व्यस्त है ,तो रोजाना की दौड़-धूप में जीवन को जीना ही भूल जाते है. चेहरों की हंसी अजनबी हो जाती है तो इसी रोज की दौड़-धूप से ही कुछ हंसी के पलों को चुराने की कोशिश है,कुछ इस तरह -- एक बस पकड़ रहा है,और एक सर क्योकि स्कूटर पंचर हो गया है और अब... [पूरी पोस्ट]
writer रूपम

हंशी

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[16 Sep 2009 14:11 PM]

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