क्या कहा .... प्रेम हो गया?
बनने लगा था इन्सां,पर अब रहा नहींगर यूंही था मिटाना ,तो फिर बनाया क्यों था खोता चला गया हूँ ,ज़माने की भीड़ में तोगर छोडनी थी ऊँगली तो अपना बनाया क्यों था बढ़ने की मैं अकेले ,कर ही रहा था कोशिशसहारा यूंही था छुडाना,तो साथ आया क्यों था भरोषा किया था इतना,...
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रूपम
इश्क
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[22 Sep 2009 05:31 AM]



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