कहानी
झारखंड का प्रकाश स्तम्भ साहित्यकार राधकृष्ण जी की एक अनुपम कृति- एक लाख संतानवे हजार आठ सौ अट्ठासीसमय व्यतीत होता जा रहा है ओर यह कहानी अभी तक चल रही है। मगर इस कहानी के शीर्षक को लेकर भ्रम हो जाता है, क्योंकि शीर्षक के साथ कहानी की संगति नहीं बैठती।...
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Arun Kumar Jha
साहित्य
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[24 Sep 2009 10:15 AM]



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