आंसू अगर बिकते कहीं,होता बहुत धनवान मैं

sahityakash -डॉ. अशोक प्रियरंजन'हर झुर्रियों से झांकते सौ-सौ दिवाकर ओज के, अपना सफर पूरा किया, अब पंख किरणों के थके।Ó 'राजस्थान दर्पणÓ में प्रकाशित इन पंक्तियों के रचयिता मेरठ के साहित्यकार और पत्रकार ८० वर्षीय विष्णु खन्ना को गए एक वर्ष बीत गया । उन्होंने १० अगस्त... [पूरी पोस्ट]
writer dr ashok kumar mishra

आकाशवाणी

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[12 Aug 2009 15:40 PM]

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