विज्ञापन का आनन्द लीजिये

श्री सत्यनारायण भटनागर जी का पन्ना आज के युग में विज्ञापनों का महत्व स्वयंसिद्ध है। जूते - चप्पल से लेकर टाई - रूमाल तक हर चीज विज्ञापित हो रही है। लिपस्टीक, पावडर, नेलपालिश, माथे की बिन्दिया विज्ञापनों का विषय है। नमक जैसी आम इस्तेमाल की वस्तुएँ भी विज्ञापनो से अछूती नहीं रह पायी है।... [पूरी पोस्ट]
writer सत्यनारायण भटनागर
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[27 Sep 2009 22:52 PM]

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