ज़िन्दगी गाँव है

मेरी रचनाऍ धूप है छांव है ज़िन्दगी गाँव है तेज धूप का सफ़र और थके पाँव है केवट सी जिंदगी रोजगार नावं है कोयल की कुहू है कौवे की कांव है हार जीत का फेंसला खेल है दांव है जिन्दगी गाँव है विपिन बिहारी गोयल --Peace and Love... [पूरी पोस्ट]
writer विपिन बिहारी गोयल
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[14 Aug 2009 05:57 AM]

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