जाने कैसे लोग
जाने कैसे लोग यहाँ बसते हैं जलता है जब घर किसीका ,हँसते हैं समझाते हैं ज़माने की ऊँच नीच हमकोख़ुद अपनी नियत पर जो नकाब रखतें हैं खुश हैं अगर आप तो क्यों खुश हैं रचते हैं कोई साजिश दिल आपका दुखाते हैं छिपके करते हैं वार,भाग जाते हैंजुबाँ शेर की जिगर...
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विपिन बिहारी गोयल
मेरी कहानी
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[24 Aug 2009 14:57 PM]



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