लौट के ना आ जाना
बहुत भीड़ है कहीं भी खो जाना तुम कहीं लौट के ना आ जाना मुसाफिर हूँ मुश्किल है कहीं पर रूक जाना ढूंढोगे जहॉ छोड़ा था तो मुश्किल है पा जाना तुम कहीं ...................... भूला के कल को मैने आज इतना से है जाना मैं न याद रख पाऊगा तुम्हारा मुस्कराना,...
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विपिन बिहारी गोयल
कविता
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[29 Aug 2009 13:17 PM]



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