छोटी सी बात
छोटी सी बात का अफसाना बना दिया अपना था तुम्हारा, बेगाना बना दिया अधेंरे में पल रहा था सपनों का भ्रम रोशनी ने उनको पागल बना दिया उम्र बहुत लम्बी है पर समय बहुत कम आकाश को आंकाक्षाओं की सीमा बना दिया रूक तो मैं जाता पर...
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विपिन बिहारी गोयल
कविता
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[19 Sep 2009 13:14 PM]



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