गिर जाती कभी . . . .

Ladli बाहों के झूले में चुप हो जाती सपनों की दुनिया में खो जाती कभी मुस्‍काती सोते-सोते जब, मां तो बस तुझमें खो जाती । खिलौने हांथ में लेकर वह मुझे, नन्‍हें कदमों से कभी देने आती । पैर धरती पर रखती तो लगता, उड़ रही हो देख मुझे भाग आती । गिर जाती कभी घुटनों के... [पूरी पोस्ट]
writer sada

लाडली

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[02 Sep 2009 02:13 AM]

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