तलाश एक द्रोण की
मैं जानता हूं कि आजद्रोण मर चुका हैफ़िर भी मुझेरहती है तलाश/हर चेहरे में एक द्रोण की।मैं तलाशता हूं उसेसुबह से शाम तकशाम से रात तकदोपहर की चिलचिलाती धूप मेंबरसात के थपेड़ों के बीचकि शायद कहीं वह----।मैं उसे तलाश करता हूंविद्या मन्दिरों के विध्वंसित...
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creativekona
कविता
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[17 Sep 2009 08:20 AM]



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