रामकली
बहुत सालों के बादआज इस चेहरे को देखा हैदिमाग पर काफ़ी दबाव देने के बाद याद आयाइसका नाम रामकली है।रामकली उन दिनोंलहलहाता खेत थीएक भरा पूरा गुलदस्ताऔर जिन्दगी को जीने कीएक अदम्य लालसा थी उसकी आंखों में।खनखनाती हंसी बिखेरतीमहफ़िलों की रौनक रामकलीआज बाजार में...
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creativekona
कविता
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[21 Sep 2009 03:09 AM]



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