स्मृति-दीर्घा ...

स्मृति-दीर्घा ... स्मृति गीत-पितृव्य हमारे नहीं रहे.... आचार्य संजीव 'सलिल'*वे आसमान की छाया थे.वे बरगद सी दृढ़ काया थे.थे-पूर्वजन्म के पुण्य फलित वे,अनुशासन मन भाया थे.नवस्वार्थवृत्ति लख लगता है भवितव्य हमारे नहीं रहे.पितृव्य हमारे नहीं रहे....*वे हर को नर का वन्दन थे.वे... [पूरी पोस्ट]
writer आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

elegy

views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[23 Sep 2009 00:42 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix