बादल मंडरा रहे हैं...!

कलरव बादल मंडरा रहे हैंखुशियों केजाने कब बरस जांयकर दें सराबोर इस पूरे आभामंडल को ।रोम रोम हो जाय पुलकिततुम्हारे आने की तमन्नाओं का सफरजल्द ही रंग लायेगा ।ऐसा लगता हैमंजिल अपनी ओर सायास ही रंग बिरंगे स्वप्न लियेआकर्षित कर रही है ।तुम साथ हो तभी सारी खुशियों... [पूरी पोस्ट]
writer हेमन्त कुमार

कविता

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[24 Sep 2009 19:13 PM]

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