गज़ल : नई दुनिया
जब भी खुद को तन्हा पाईये ।लंबी कतारों में खड़े हो जाईये ॥शौक है अगर ताकत आजमाने का ।जा पत्थरों से आज सर टकराईये ॥आज मौसम की पहली बारिश है ।पाप अपने भी कुछ बहा आईये ॥खुशबू फ़ूलों की आज चुरा ली किसने ।चाँद तारों से नया गुलिस्तां सजाइये ॥बेकार है अभिमन्यु...
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Deepak Kumar
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[04 Sep 2009 00:40 AM]



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