संकल्प

kamlesh pandey संकल्प जिंदगी क्यों इस कदर बदरूप होती जा रही ?कल तक जिनके चेहरे थे जाने -पहचानेअचानक उन चेहरों पर उभर आती हैं ऍसी लकीरेंजिन्हें देख अक्सर भेड़ियों का ख्याल उभरता है।आदमी अब क्यों नहीं दिखता सहज इन्सान की भांतिचारों ओर दिख रहे हैंसिर्फ रीछ, भालू, मगरमच्छ,... [पूरी पोस्ट]
writer kamlesh
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[04 Sep 2009 10:06 AM]

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