कब से
पुकारता हूंमैं कब से तुम्हेंपरतुम चुप क्यों हो ?यह भी भला कोई बात हुई -राह लंबीडगर कठिनभरी भीड़ में तमाम अकेलेअपने कांधे पर टिकाये सिरचले जा रहेन जाने किस राहदिन के उजाले में भीपहचानना मुश्किलचलें किसके साथकिस डगरहै कौन अपना हमसफर ?तुम कहोराह कटेन चुप...
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kamlesh
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[01 Aug 2009 10:02 AM]



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