कसी लगाम
मैं कई बार
कुछ कहना चाहता हूं
पाता हूं
मुंह पर कसी है लगाम और अब वे सपनों पर भी हक जमाने की कर रहे हैं आपस में बात। हम धृतराष्ट्र बनने को अभिशप्त कारण दौड़ रहा है
हमारी धमनियों में उनका नमक
व
टंगी है हमारी आंखों
भयावह कल की तस्वीरें। सच हममें से हरेक...
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kamlesh
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[16 Sep 2009 08:59 AM]



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