मिलाओ न सुर अजानों से, ये राग भड़क जाएगा
कुरेदोगे दिल की जानिब, ये घाव दरक जाएगा।मिलाओ न सुर अजानों से, ये राग भड़क जाएगा।हम तो समेट ही लेते, मुठ्ठी में आसमां यूं हीक्या खबर मंजिल से ही, ये पांव सरक जाएगा।अब ये सिला हमको कुबूल, दोजख में जो रुलाएगा।लो हटा लो तुम नकाब, ये दांव पलट जाएगा।क्यूं...
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[06 Aug 2009 03:11 AM]



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