पता नहीं;ये चादर किसी के काम आ जाए !

जाने क्या मैंने कही जी चाहता हैजी चाहता हैकि जीवन का हर क्षण जी लूँऔर वह भी ऐसा जियूँकि जीवन का हर क्षणसार्थक हो जाएमुझसे किसी कीकोई शिकायत न रह जाए*जी चाहता हैकि जीवन का हर घूँट पी लूँऔर वह भी ऐसा पियूँकि हर घूँट ख़ुद तृप्त हो जाएबस सारी तिश्नगी मिट जाए*जी चाहता हैकि जीवन... [पूरी पोस्ट]
writer नरहरि पटेल

मेरी कविताएँ.हिन्दी.कविता.

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[24 Jul 2009 00:21 AM]

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