शब्द सुधा की सादर प्रस्तुति .....२

shabdsudha मेरी पहली पोस्ट के बाद बहुत सी ईमेल आईं कि मैं अपने कुछ प्रियजनों को भूल गई हूँ. नहीं दोस्तों! प्रियजन प्रिय होते हैं, उन्हें कैसे भूला जा सकता है? वे मेरे ही नहीं जन -जन के प्रिय हैं, मेरे अनुज हैं और उनका स्नेह ही मेरी शक्ति है. छोटों की बारी हमेशा बाद... [पूरी पोस्ट]
writer Shabdsudha

आत्मिकी

views
6
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[21 Jul 2009 23:13 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix