लघु कथा : दौड़
मैं अपने बेटे को निहार रही थी. वह मेरे सामने लेटा अपने पाँव केअँगूठे को मुँह में डालना चाह रहा था. और मैं उसके नन्हे-नन्हे हाथोंसे पाँव का अँगूठा छुड़वाने की कोशिश कर रही थी. उस कोशिश मेंवह मेरी उँगली को भी मुँह में डालना चाहता था. चेहरे पर चंचलता,आँखों...
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Shabdsudha
लघु कथा
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[25 Aug 2009 09:10 AM]



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