रात भर
रात भरयादों कोसीने मेंउतारती रही,चाँद- तारोंको भीचुप-चापनिहारती रही.शांतवातावरणमें नहलचल हो कहीं,तेरा नामधीरे सेफुसफुसा करपुकारती रही.तेरी नजरेंजब भीमिलींमेरी नज़रों से,उन क्षणों कोसमेटपलकों का सहारादेती रही.उदासवीरानउजड़ेनीड़ को,अश्रुओंकुछ आहोंचंद...
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Shabdsudha
कविता
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[25 Aug 2009 09:07 AM]



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