कुछ अपनी कुछ पराई

shabdsudha बार्नस एंड नोबल पुस्तकों के स्टोर में स्थानीय अमरीकी कवियों का एक ग्रुप इकठ्ठा होता है, इस का पता जब मुझे चला तो मैं भी वहाँ जाने लगी. कुछ दिन तो औपचारिकता रही, फिर शीघ्र ही उन्होंने मुझे स्वीकार लिया.  हर माह के तीसरे रविवार हम मिलते थे. अपनी -अपनी... [पूरी पोस्ट]
writer Shabdsudha

कविता/ आत्मिकी

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[01 Sep 2009 22:57 PM]

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