यार पुराने छूट गये तो छूट गये
यार पुराने छूट गये तो छूट गयेकांच के बर्तन टूट गये तो टूट गयेसोच समझ कर होंट हिलाने पड़ते हैंतीर कमाँ से छूट गये तो छूट गयेशहज़ादे के खेल खिलोने थोड़ी थेमेरे सपने टूट गये तो टूट गयेइस बस्ती में कौन किसी का दुख रोये भाग किसी के फूट गये तो फूट गये छोड़ो...
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JATINDER PARWAAZ
मुशायरा
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[23 Jul 2009 04:15 AM]



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