बारिशों में नहाना भूल गए

QALAM E SHAIR बारिशों में नहाना भूल गएतुम भी क्या वो ज़माना भूल गएकम्प्यूटर किताबें याद रहींतितलियों का ठिकाना भूल गएफल तो आते नहीं थे पेड़ों परअब तो पंछी भी आना भूल गएयूँ उसे याद कर के रोते हैंजेसे कोई ख़ज़ाना भूल गएमैं तो बचपन से ही हूँ संजीदातुम भी अब मुस्कुराना भूल गए... [पूरी पोस्ट]
writer JATINDER PARWAAZ

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[26 Jul 2009 04:33 AM]

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