मुझ को खंज़र थमा दिया जाए

QALAM E SHAIR मुझ को खंज़र थमा दिया जाए फिर मिरा इम्तिहाँ लिया जाए ख़त को नज़रों से चूम लूँ पहले फिर हवा में उड़ा दिया जाए तोड़ना हो अगर सितारों को आसमाँ को झुका लिया जाए जिस पे नफरत के फूल उगते हों उस शजर को गिरा दिया एक छप्पर अभी सलामत है बारिशों को बता दिया जाए सोचता... [पूरी पोस्ट]
writer JATINDER PARWAAZ

urdu shairy

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[04 Aug 2009 02:13 AM]

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